🙏🏻 भानु सेवा संस्थान 🙏🏻
रक्तदान क्यों करना चाहिए एवं इसके क्या लाभ हैं
~ आंकड़ों के अनुसार हमारे देश में हर दिन करीब 12 हजार लोगों की मौत समय पर रक्त ना मिल पाने के कारण हों जाती है। भारत सरकार के अनुसार हर साल लगभग 15 लाख यूनिट ब्लड की जरूरत होती है जबकि समाज में फैली भ्रांतियों एवं रक्तदान के प्रति जागरूकता ना होने के कारण केवल 11 लाख यूनिट रक्त हीं उपलब्ध हों पाता है। यानी जरूरत के हिसाब से लगभग 4 लाख यूनिट रक्त की कमी हर साल होती है।
~ अगर कोई रक्तदान करता हैं तो सर्वप्रथम रक्तदान करने के लिए व्यक्तिगत स्वार्थ को ना खोजकर सेवा के भाव खोजना चाहिए शास्त्रों में भी कहां गया हैं सेवा प्रमो धर्म यानि सेवा हीं सबसे बड़ा धर्म हैं। व्यक्तिगत स्वार्थ से ऊपर उठकर इंसान...इंसान के काम आएं की भावना से हमें रक्तदान करना चाहिए क्योंकि आपका एक यूनिट रक्त सिर्फ एक जान नहीं तीन लोगों की जान बचा सकता है।
~ रक्तदान को लेकर व्यक्तिगत हितों को देखे तो रक्तदान करने के बहुत से लाभ भी हैं। विस्तृत में बात करें तो विभिन्न शोध बताते हैं कि रक्तदान करने से न केवल रक्त पाने वालें की जान बचती है बल्कि रक्त देने वालों को भी कई फायदे होते हैं। एक शोध के अनुसार नियमित रक्तदान करने वालें इंसानों में हार्ट अटैक का खतरा 88 प्रतिशत तक कम होता है। इसके अतिरिक्त हृदय से जुड़ी अन्य बीमारियों का खतरा भी 33 प्रतिशत तक कम हों जाता है। कोलंबिया यूनिवर्सिटी मेडिकल सेंटर के अनुसार यदि आपका हीमोग्लोबिन (खुन की मात्रा) ज्यादा है तो ब्लड डोनेशन से रक्त का गाढ़ापन कम होता है जबकि रक्त के अधिक गाढ़ा होने से उसका थक्का जमने का जोखिम रहता है इस जोखिम से हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा बढ़ता है। इसलिए नियमित रूप से ब्लड डोनेशन करने से दिल की सेहत पर बेहद अच्छा असर है। नियमित रक्तदान से रक्त का गाढ़ापन कम होता है जो ब्लड प्रेशर को कम करता है, जिससे हार्ट अटैक का खतरा घटता है। इनके अलावा ऑक्सफोर्ड एकेडमिक के अनुसार नियमित रक्तदान करने से पेट, गले, फेफड़े और आंतों के कैंसर का खतरा भी कम होता है। रक्तदान करने से लिवर सेहतमंद रहता है। रक्तदान से इससे इम्यूनिटी बढ़ती है जो शरीर की स्पूर्ति और ताकत को बढ़ाती हैं।
~ कोई अगर सोचता है कि रक्तदान करने से हमारे शरीर में खून कम पड़ जाएगा तो ऐसा बिल्कुल भी नहीं हैं क्योंकि रक्तदान करने के 24 घंटे बाद शरीर अपने आप प्लाज्मा (रक्त) की भरपाई कर लेता है। रक्त में दो तरह के कंपोनेंट (घटक) होते हैं पहला प्लाज्मा और दूसरा सेल्युलर कंपोनेंट, सेल्युलर कंपोनेंट में रक्त कणिकाएं आती हैं इसमें प्लाज्मा की भरपाई लगभग 24 घंटे में हो जाती हैं। वहीं सेल्युलर कंपोनेंट जैसें कि लाल रक्तकणिकाएं, सफेद रक्त कणिकाएं आदि की पूरी तरह से भरपाई होने में 4 से 8 सप्ताह का समय लगता है इसीलिए रक्तदान करने वालों को कम से कम तीन महीने का गैप रखना चाहिए।
कौन-कौन कर सकता हैं रक्तदान
~ डाइबिटीज और थॉयराइड होने पर भी रक्तदान कर सकते हैं। कई बार बीमारी से ग्रसित होने पर हम रक्तदान से कतराते हैं, लेकिन सरकारी गाइडलाइन के अनुसार डायबिटीज, थॉयराइड और यूरिक एसिड जैसी लाइफ स्टाइल बीमारी से पीड़ित लोग भी रक्तदान कर सकते हैं। बशर्ते डायबिटीज पीड़ित इंसुलिन न ले रहा हो। केवल गोली ले रहा हो। पिछले चार महीने से दवाइयों में बदलाव न किया हो। और शुगर नियंत्रित हो। ऐसे ही यदि आप थायराइड पीड़ित हैं, लेकिन यह पूरी तरह नियंत्रित है तो ब्लड डोनेट कर सकते हैं। ऐसे ही यूरिक एसिड की समस्या से पीड़ित भी ब्लड डोनेट कर सकता हैं। 18 वर्ष के ऊपर के प्रत्येक इंसान महिला व पुरुष दोनों जिनका वजन 50 किलोग्राम से अधिक हैं और स्वस्थ हैं उन सभी को वर्ष में 2-3 बार रक्तदान अवश्य करना चाहिए। भानु सेवा संस्थान सभी जागरूक व्यक्तियों से आग्रह करतीं हैं ज्यादा से ज्यादा रक्तदान करके सैकड़ों लोगों की ज़िंदगियां बचाकर अपना इंसान होने का कर्तव्य निभाएं एवं अधिक से अधिक संख्या में पुरूषों के साथ महिलाओं को भी रक्तदान की मुहिम में जोड़ें।
🌺 भवानी शंकर उर्फ भानु (रक्तवीर) के जीवन से संबंधित महत्वपूर्ण घटनाएं एवं प्रेरणाएं 🌺
भवानी शंकर उर्फ भानु। जिनका रक्तदान करना और करवाना हीं शौक सैंकड़ों रक्तदान से कइयों की जान बचाने में रहें मददगार।
फिल्मी दुनियां में मारवाड़ का उभरता हुआ युवा जिसने अभिनय की दुनियां में भी रखे थें कदम।
छोटी उम्र काम बड़े थें भानु के।
- नाम - भवानी शंकर उर्फ़ भानु (रक्तवीर)
- पिता - श्री दमाराम (अध्यापक)
- मात - लक्ष्मी देवी
- जन्म - 31 जुलाई 1998
- निधन - 16 अक्टूबर 2023
- पता - एका, रामदेवरा, जिला जैसलमेर
- उम्र - 25 वर्ष
- शिक्षा - प्रारंभिक शिक्षा 1 से 10 तक आदर्श विद्या मंदिर माध्यमिक विद्यालय फलोदी, 11-12th सांइस बायोलॉजी (जीव विज्ञान) राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय फलोदी एवं सिविल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा पोकरण पॉलिटेक्निक कॉलेज।
सामाजिक क्षेत्र में कार्य करने की प्रेरणा
आदर्श विद्या मंदिर फलोदी में पढ़ते हुए कक्षा 8 वीं में प्रथम स्थान प्राप्त करने पर तत्कालीन नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमान अगरचंद भाटी एवं तत्कालीन विधायक श्रीमान पब्बाराम जी बिश्नोई द्वारा सम्मानित करने के कारण भानु को सामाजिक क्षेत्र में अच्छा करने की प्रेरणा मिली।
रक्तदान की प्रेरणा
अपने पिता अध्यापक दमाराम से। दमाराम शिक्षक होने के साथ-साथ हमेशा हीं सामाजिक क्षेत्र के कार्यों से जुड़े रहें हैं। अध्यापक दमाराम जी स्वयं अभी-तक 23 बार रक्तदान कर चुके हैं। 2012 में जब अपने पिताजी दमाराम जी का एक्सीडेंड होने के कारण कुछ समय तक भानु उनके साथ हॉस्पिटल में साथ रहा तो उस समय हॉस्पिटल में ब्लड की कमी से जूझ रहें लोगों को देखकर मानवीय भाव से प्रेरित होकर भानु ने 18 वर्ष का होने के बाद रक्तदान करने का निर्णय लिया था। तत्पश्चात भानु अपने पिताजी से सिखकर उनके बताएं मार्ग पर चलता गया। जब भानु थोड़ा बड़ा और समझदार हुआ तो फिल्म अभिनेता सलमान खान के बॉन मेरो दान से प्रेरित होकर रक्तदान एवं अन्य मानव हितैषी कार्यों को करना शुरू कर दिया था। 25 वर्ष की उम्र होने तक भानु स्वयं ने आपातकालीन स्थितियों में 13 बार रक्तदान भी किया।
प्रमुख सामाजिक कार्य
- रक्तदान शिविर
- रक्तदान टीम
- अंगदान
- कार्य से प्रभाव
- कोरोंनाकाल विशेष सेवा
- समुद्र तटीय भाग स्वच्छता अभियान में भाग
- समर्पण
- अभिनय क्षेत्र
- फिल्मी सितारों से जुड़ाव
भानु के मरणोपरांत उनके मानव कल्याण कार्यों को चिरस्थाई रखने हेतु उनके चाहने वालों द्वारा नई शुरुआत की गई। मानवता प्रेमी एवं भानु के चाहने वालों ने भानु सेवा संस्थान नाम की टीम बनाई।
टीम का उद्देश्य आपातकालीन स्थितियों में जरूरतमंदों को रक्त उपलब्ध करवाना, विभिन्न अवसरों पर रक्तदान शिविरों का आयोजन करना, प्रदेश में किसी भी प्रकार की आपात स्थिति में वॉलिंटियर के रूप में सेवाएं देना, वृक्षारोपण अभियान चलाना, जरूरतमंदों के कपड़ों-भोजन की व्यवस्था करवाना, शिक्षा के प्रति समर्पित विद्यार्थियों की हर संभव मदद करना आदि जनहितकारी कार्य सम्मिलित हैं।
भानु सेवा संस्थान के द्वारा पिछले 2 साल के भीतर 6-7 रक्तदान शिविरों का आयोजन करवाया जा चुका हैं जिनमें 1000 युनिट से अधिक रक्त संग्रहित किया गया और आपातकालीन लाइफ सेविंग स्थितियों एवं गर्भवती महिलाओं के लिए 1000 युनिट से अधिक का रक्तदान फलोदी, जोधपुर, बीकानेर, जयपुर, जैसलमेर, दिल्ली आदि शहरों में करवाया जा चूका है।